बाज़ार की भीड़ के बीच अनिल खड़ा था। उसके हाथ में एक अजीब-सी किताब थी—“उठा-पटक”।
वह पिछले एपिसोड की घटनाओं से जैसे अचानक वर्तमान में लौट आया।अनिल ने किताब खोली और पढ़ना शुरू
किया। पहले ही पन्ने पर एक शीर्षक चमक रहा था ….. “जब सपनों की रानी बनी टीचर”
मधुबाला
धूप से भरी एक दोपहर थी। सड़क किनारे पड़े कूड़ेदान के पास एक छोटा लड़का कुछ ढूँढ़ रहा था। अचानक उसे कागज़ों के बीच एक पुरानी किताब मिल गई। वह खुशी-खुशी किताब उठाकर आगे बढ़ा ही था कि तभी सामने से आते हुए रोनी ने उसके हाथ से किताब झटके से ले ली।
“ये किताब तुम्हें कहाँ मिली?” रोनी ने उत्सुकता से पूछा। लड़का बोला, “कबाड़ के डिब्बे में पड़ी थी… सोचा रद्दी में बेच दूँगा।”रोनी ने किताब को पलटकर देखा। कवर पर मोटे अक्षरों में लिखा था—“उठा पटक” उसने धीरे-धीरे पन्ने पलटे। कुछ पंक्तियाँ पढ़ते ही उसके चेहरे पर हैरानी उभर आई।कहानी में एक महिला का ज़िक्र था — “मधुबाला”


