किशोर कुमार की Love Story 4 बीवियाँ… लेकिन फिर भी अकेले! क्यों टूटी Kishore Kumar की हर शादी ?

4 बीवियाँ… फिर भी अकेले! 😢 Kishore Kumar Love Story | जो दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा में 10 साल की बच्ची का रोल कर चुकी है। इस लड़की को नितिन बोस अपनी फिल्म के लिए साइन कर चुके हैं। जी हां, उस लड़की का नाम होता है रूमा देवी। रूमा देवी के साथ किशोर कुमार मुंबई के जूहू बीच पर घंटों वक्त बिताते हैं। दोनों हाथों में हाथ डालकर मुंबई में घूमते रहते हैं। ये दोनों के इंटरेस्ट और दोनों के शौक मिलते हैं। रूमा देवी के इनकी जिंदगी में आने के बाद किशोर कुमार के दरवाजे खुलने लगते हैं और वह किस्मत के दरवाजे यहां तक कि मद्रास से उनको गाने के लिए ऑफर आने लगते हैं। एसडी बर्मन मद्रास. फिल्म कंपनी की एक फिल्म कर रहे हैं। बहार 1951 में उस बहार फिल्म के गाने के लिए किशोर कुमार मद्रास जाते हैं और गाना रिकॉर्ड करने के बाद रूमा देवी से बात करते हैं। रूमा देवी फोन पर कहती है कि हम लोग के पास अब वक्त नहीं है। हमें अब शादी कर लेनी चाहिए। किशोर कुमार मद्रास से संताक एयरपोर्ट उतरते हैं। उनके पास दुविधा है कि मैं अपने घर जाऊं या रूमा देवी के घर जहां उनके दोस्त इंतजार कर रहे हैं और शादी की तैयारी वहां पर हुई पड़ी है। किशोर कुमार के कदम खुद ब खुद रूमा देवी के घर की तरफ चला जाता है और रूमा देवी के साथ कुछ

दोस्तों के प्रेजेंस में किशोर की शादी हो जाती है और दोनों एक नई जिंदगी शुरू करते हैं। किशोर की जिंदगी में रूमा देवी के आने के बाद जैसे चमत्कार हो जाता है क्योंकि किशोर के पास इतने ऑफर्स आने लगते हैं एक्टिंग के गायकी के स्टेज शो के कि उसमें मशगूल हो जाते हैं। रूमा देवी क्योंकि वह घर बसाना चाहती है इसलिए वह अपना अभिनय और गायकी को तिलांजलि देकर घर पर रहना शुरू करती है और किशोर कुमार बहुत सारे रिकॉर्डिंग्स बहुत सारे फिल्मों की शूटिंग बहुत सारे स्टोरी शो में अपने आप को मशगूल पाते हैं। 1952 में रूमा देवी और किशोर कुमार के यहां एक बच्चा पैदा होता है जिसका नाम रखा जाता है अमित कुमार। अमित जैसे-जैसे बड़ा हो रहा है, रूमा देवी चाहती है कि बच्चे के साथ किशोर वक्त दें। थोड़ा सा हम समय बिताए लेकिन किशोर के पास क्योंकि इतने ऑफर हैं, इतने पैसे आ रहे हैं कि वो पैसे को रोकना नहीं चाहते। वो बोलते हैं कि लक्ष्मी आ रही है उसे आने दो। इसलिए वो कभी शाम को नहीं लौटते। कभी अपनी बीवी के साथ डिनर नहीं कर पाते। वो हमेशा सुबह 3:00 बजे 4:00 बजे आते हैं और फिर सुबह तैयार होकर निकल जाते हैं। अब इस चीज से बच्चे और रूमा देवी दोनों फेड अप हो जाते हैं और वो किशोर कुमार को कहती है कि तुम कहीं छुट्टी में हमें नहीं ले जा रहे हो। बच्चा बड़ा हो रहा है। क्या सोचेगा? और किशोर कुमार हमेशा उनको दिलासा देते हैं इस छुट्टी में मैं दार्जिलिंग लेकर चलूंगा। इस छुट्टी में मैं तुम्हें जम्मू कश्मीर लेकर चलूंगा। लेकिन होता यह है कि जैसे ही वह दिन आता है किशोर कुमार दूसरे स्टेज शो ले लेते हैं और वहां पर वो स्टेज शो में चले जाते हैं और फिर इंतजार करना पड़ता है रूमा देवी और अमित कुमार को। रूमा देवी फैसला करती है कि मैं अब किशोर के साथ जिंदगी नहीं गुजार सकती और वह डिवोर्स फाइल करती है। 1960 में दोनों अलग हो जाते हैं। [संगीत] कोलकाता चली आती है और किशोर कुमार बॉम्बे में रह जाते हैं। कोलकाता में आने के बाद रूमा देवी अपना अभिनय और गायकी शुरू करती है। कई बंगाली फिल्मों में जैसे सत्यजीत रे की फिल्म गण शत्रु में रोल करती है। दिलीप कुमार की फिल्म बैराग में अपर्णा सेन की फिल्म 36 चौरंगी लेन में वह अभिनय करती है। अपनी सिंगिंग का जो करियर है उसको भी शुरू करती है। लेकिन किशोर कुमार मुंबई में यहां धीरे-धीरे मधुबाला के करीब होते जाते हैं। मधुबाला किशोर के उपस्थिति में बहुत हंसती है। बहुत खिलखिलाती है. क्योंकि उसको किशोर का साथ बहुत अच्छा लगता है और किशोर से कहती है कि किशोर मैं सिंगल बनना नहीं चाहती। मैं चाहती हूं कि जब मैं मरूं तो मैं मैरिड खलाऊं मैरिड रहूं। और उसी में 1960 में किशोर कुमार और मधुबाला शादी कर लेते हैं। किशोर कुमार अपनी बीवी मधुबाला को लेकर अपने घर जूहू आते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद ही मधुबाला की तबीयत खराब होने लगती है। क्योंकि वहां पास में एयरपोर्ट से जब जहाज उड़ता है तो उसकी चीखती हुई आवाज मधुबाला के लिए असहनीय होता है। किशोर कुमार फैसला करते हैं कि फिलहाल कुछ दिनों के लिए मधुबाला को मैं उसके घर बांद्रा में शिफ्ट कर देता हूं और वह अताउला खान के घर उसके पिता के घर मधुबाला को पहुंचाते हैं और काम से शूटिंग से वापस होने के बाद शाम को वो भी बांद्रा जाकर रुकते हैं। तकलीफ यह है कि मधुबाला और किशोर कुमार एक बेड पर सोते हैं। लेकिन वह दोनों में कोई प्रेम नहीं है। प्रेम नहीं हो सकता क्योंकि डॉक्टर ने मना किया है क्योंकि मधुबाला उस समय असह पीड़ा से गुजर रही होती है। मधुबाला का रोग इतना असहनीय हो जाता है कि वो चिढ़ती है। चिड़चिड़ा जाती है कि मैं जो मेरा शौहर है जिसे मैं प्रेम कर सकती हूं वो प्रेम करने से भी डॉक्टर की मनाही है। अब यह मैं जिंदगी कैसे जीूं? वो किशोर कुमार से कहती है कि किशोर क्या मैं बदसूरत दिखने लगी हूं? क्या मेरा यह रोग का कोई इलाज नहीं है? क्या कोई करिश्मा नहीं हो सकता है कि मैं इस दर्द से निकल जाऊं? क्योंकि मुझे तो अभी जिंदगी जीना है किशोर। मुझे तो अभी सजना है, सवारना है। अभी कई सारी फिल्में करनी है। किशोर कुमार कहते हैं कि तुम अभी भी खूबसूरत हो। तुम वैसे ही हो। नहीं। बोले कि मैंने शीशा देखना बंद कर दिया है किशोर क्योंकि मेरी बड़ी पा कहती है कि तुम्हारी आंखों के आगे स्या काला पड़ता जा रहा है। मेरी आंखों के आगे जो है वो दाग निकलता जा रहा है। मैं हड्डी होती जा रही हूं। इसलिए मैंने शीशा देखना बंद किया। किशोर कुमार उसे तिल तिल मरते हुए देख रहे होते हैं। जब किशोर कुमार शूटिंग से लेट आते हैं या कभी-कभी 4 दिन पांच दिन के लिए शेर शो के लिए चले जाते हैं तो मधुबाला चिल्लाती है, चीखती है, लड़ती है और किशोर पर कुछ तोहमतें भी लगाती है। लेकिन किशोर को मालूम है कि अब यह नाजुक दौर से गुजर रही है और फिर उनके गले लगकर वो फूट-फूट कर रोने लगती है। आखिरी वह दिन आ ही जाता है मधुबाला का जिस दिन उसकी सांसे उखड़ने लगती है और घर पर किशोर कुमार नहीं है। मधुबाला अपनी आपा से कहती है कि आपा क्या तुम फोन लगा सकती हो? वो बोलती है कि अभी-अभी किशोर से बात हुई है। बोले नहीं किशोर को नहीं युसुफ साहब को। वो दिलीप कुमार के नाम ले रही है। बोले यूसुफ साहब को तुम फोन लगा सकती हो। आज मैं अपना सारा गिले शिकवा मैं खत्म करना चाहती हूं। मैं उनकी आवाज सुनना चाहती हूं। आपा घंटी जा रही है क्या? आपा किसी ने फोन उठाया क्या? उधर से आपा उनकी आती है और कहती है कि फोन उठाया लेकिन यूसुफ भाई घर पर नहीं है। वह शूटिंग के लिए बॉम्बे से बाहर है। थोड़ी देर बाद ही मधुबाला दुनिया को अलविदा कह के चली जाती है। शांताज के कब्रिस्तान में जब किशोर कुमार अपनी महबूबा और बीवी मधुबाला को मिट्टी दे रहे होते हैं तब उनको यह बात मालूम पड़ती है कि अंतिम समय में आखिरी वक्त में मधुबाला उनको नहीं बल्कि दिलीप कुमार को याद कर रही थी। किशोर कुमार कहते हैं कि भला वह यूसुफ को क्यों नहीं याद करें क्योंकि यूसुफ मधुबाला का पहला प्यार थे। उसके बाद किशोर कुमार की शादी योगिता बाली से होती है और कुछ दिनों के बाद फिर उनकी शादी लीला चंद्रवाकर से होती है। किशोर कुमार रात दिन 24 घंटे व्यस्त हैं क्योंकि स्टेज शो से लेकर रिकॉर्डिंग से लिए फिल्म निर्माण से लिए सब में उनका वक्त लगातार जा रहा है। अपनी पत्नी लीना चंद्रभाकर के साथ वो ज्यादा वक्त भी नहीं निकाल पाते। लेकिन किशोर कुमार को यह पैसे और शोहरत और यह नाम अब इतने मिल चुके हैं कि अब किशोर कुमार को उससे उम होने लगी है। उनके जिंदगी में सुकून नहीं है। उनके जिंदगी में कुछ लम्हे नहीं है कि वो अकेले बैठ सकें या अपने परिवार के साथ वो कुछ समय बिता सकें। तो वो फैसला करते हैं कि अब अपनी जन्मभूमि खंडवा हम लौट जाएंगे। खंडवा लौटने के लिए वह चाहते हैं कि वहां पर मैं खेती करूंगा, भगवानी करूंगा, मछली पालन करूंगा। अपनी पत्नी लीना को बोलते हैं कि तुम खंडवा चलने की तैयारी करो। लीना बोलती है यह सितंबर का महीना है। कब जाने का फैसला आपने किया है। किशोर कुमार कहते हैं कि अगले महीने सारी पैकिंग शुरू करो। अगले महीने हम खंडवा चले जाएंगे। अक्टूबर महीना जैसे ही आता है घर में ही किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ता है। 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार इस दुनिया से चले जाते हैं। किशोर कुमार के शव को आर के स्टूडियो में दर्शन के लिए रखा जाता है। उनके चाहने वाले उनके प्रशंसक, उनके फैन, सारे फिल्म स्टार आर के स्टूडियो में भीड़ लगा लेते हैं। वहां पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए लोग जाते हैं। वह बेजान जिस्म को वहां से फिर खंडवा ले जाया जाता है और खंडवा के अग्नि में उनको सुपुर्द कर दिया जाता है। जिस किशोर कुमार को जीते जी खंडवा आना था। वहां भगवानी करना था। खेती करनी थी। पशुपालन करने मछली पालन करना था। वह किशोर कुमार जब दुनिया को अलविदा कर जाते हैं तो उनका बेजान जिस्म को खंडवा लाया जाता है और वहां अग्नि को सुपुर्द कर दिया जाता है। खंडवा का लाल खंडवा में अपना अंतिम संस्कार पाता है।

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