भूपिंदर ने बनाया जगजीत को स्टार सिंगर |Bollywood का सबसे बड़ा सच 😳Bhupinder ne banaya Jagjit ko Star

नमस्कार। सिनेमा किस्सा के इस एपिसोड में हम लेकर आए हैं जगजीत सिंह की कहानी। जगजीत सिंह 1965 में मुंबई आते हैं फिल्म इंडस्ट्री में सिंगर बनने के लिए। लेकिन कुछ सालों तक वो संघर्ष करते हैं और उनको वो मुकाम हासिल नहीं होता। गायक भूपेंद्र सिंह उनके मित्र बन जाते हैं। जगजीत सिंह और भूपेंद्र सिंह दोनों एक साथ रूम शेयर भी करते हैं। एक साथ स्ट्रगल भी कर रहे होते हैं। जगजीत सिंह को यह थोड़े से दिनों में यह एहसास हो जाता है कि बड़े दिग्गज गायक मोहम्मद रफी, मुकेश और किशोर के रहते हुए मेरी प्लेबैक सिंगिंग में कोई पहचान नहीं बन पाएगी। इसलिए वे म्यूजिक कंपनियों के एल्बम में गीत गाने, गजल गाने शुरू करते हैं और गजल और गीत कंपोज भी करना शुरू कर देते हैं। होता यह है कि एचएमबी जो उस समय की लीडिंग म्यूजिक कंपनी थी उसके लिए यह कुछ नज़्म कंपोज करते हैं और यह प्रपोजल लेकर जाते हैं कि मेरा मित्र जो भूपेंद्र सिंह है वो इस नज़्म को गाएगा। एचएमबी इनका प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है। एचएमबी के स्टूडियो में उस नज़्म की रिकॉर्डिंग शुरू होती है। भूपेंद्र सिंह माइक्रोफोन पर आते हैं और जगजीत सिंह के बनाए हुए कंपोज किए हुए इस नज़्म को गाना शुरू करते हैं।

भूपेंद्र सिंह जैसे ही गाना शुरू करते हैं और एक टेक पूरा होता है तो जगजीत सिंह उसको रोकते हैं और बोलते हैं कि दोबारा टेक लेना पड़ेगा क्योंकि इसमें कुछ चीजें मिस हो गई है। जैसा कि अमूमन होता है जब आप एक दोस्त होते हैं तो बड़ी जल्दी आपको बात दिल पर लग जाती है। यही हाल भूपेंद्र सिंह को हुआ। जगजीत सिंह की कही हुई यह बात भूपेंद्र सिंह ने अपने दिल पर ले लिया और उन्होंने एचएमबी कंपनी में कहा कि मैं जगजीत सिंह के संगीत निर्देशन में गीत नहीं गाऊंगा यह नज़्म नहीं गाऊंगा कहकर वो रिकॉर्डिंग से चले गए। अब हालत यह हो गई कि अब इस नज़्म को पूरा तो करना था। तो एचएमबी कंपनी ने कहा कि जगजीत सिंह आप भी गाते हो तो आप खुद ही रिकॉर्ड कर लो। और जगजीत सिंह ने मजबूरन अपनी आवाज में वो नज़्म को रिकॉर्ड किया। लेकिन भूपेंद्र सिंह के नहीं गाने से वो एल्बम निकल नहीं पाया। इस समय एक फिल्म बन रही थी और जगजीत सिंह अपने गाए हुए इस नज़्म को उस फिल्म को दे दिए। लेकिन दुर्भाग्यवश वो फिल्म भी दो चार रील बनकर बंद हो गई। वो नज़्म जगजीत सिंह के पास पड़ी रही। 1977 में एचएमबी कंपनी जगजीत औरित्रा सिंह की आवाज में एक सुपरहिट एल्बम निकालता है जिसका नाम होता है द अनफॉरगेटेबल्स और इस द अनफॉरगेटेबल्स एल्बम में जगजीत सिंह इस नज़्म को डाल देते हैं। यह वही नज़्म है जिसे भूपेंद्र सिंह ने गाने से मना कर दिया था। और यह नज़्म इतना सुपरहिट होता है कि यह नज़्म जगजीत सिंह की आवाज की पहचान बन जाता है। यह नज़्म को लिखा था कफील आज ने और यह नज़्म है कि बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी। आज के लिए बस इतना ही। नमस्कार।

“Don’t miss out—watch the full review in the video below!”