
नमस्कार। किस्से सिनेमा के में आज हम एक ऐसा वाक्या लेकर आए हैं जिसमें गीत बनने का इतिहास है। मुंबई के दादर स्टूडियो में एक गाने पर काम चल रहा है जिसमें लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और गीतकार साहिल लुध्यानवी बैठे हुए हैं और उस पहाड़ी राग पर वो धुन बना रहे हैं। तभी लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की गाड़ी आकर रुकती है और दोनों स्टूडियो में दाखिल होते हैं। साहिल लुधियानवी गीत के बोल लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी को समझाते हैं और कहते हैं कि यह गीत ऐसा है कि जब नया-नया रोमांस होता है तो नए-नए रोमांस के बाद जो नए-नए जज्बात उभरते हैं, उस पर यह गीत लिखा हुआ है। इसलिए मैंने बहुत ही सरल और सहज शब्दों का उपयोग किया है। लता जी हंसते हुए कहती है कि साहिर साहब सरल शब्दों का गाना इतना आसान नहीं है। लेकिन साहिर लुधियानवी मोहम्मद रफी की तरफ देखते हैं कि आप दोनों उसके उस्ताद हो। चाहे सरल शब्द हो, चाहे टफ शब्द हो, उसको आप जो उतान देते हैं, जो राग देते हैं, उसका कोई मिसाल नहीं। खैर हंसीखुशी के साथ जो है रिकॉर्डिंग का काम शुरू होता है।
वो गीत राग पहाड़ी पर बना हुआ है और उसमें सिमफनी स्टाइल में वलिन का प्रयोग हुआ है। अब गाने की रिकॉर्डिंग शुरू हो ही रही थी | तब तक से प्यारेलाल जी के पिताजी पंडित राम प्रसाद शर्मा स्टूडियो में दाखिल होते हैं। पंडित राम प्रसाद शर्मा के बारे में सब लोग जानते थे इंडस्ट्री में कि वो पहले ट्रमेपेट बजाते थे। पंडित राम प्रसाद शर्मा सिर्फ रिकॉर्डिंग देखने के लिए आए हैं। वह भी जाकर बैठ जाते हैं और गीत शुरू होता है। लता जी की मखमली आवाज में जब यह गीत शुरू होता है तो उसके दूसरी लाइन को मोहम्मद रफी उतने ही सहज अंदाज में उठाते हैं और एक टेक में पूरा गीत रिकॉर्ड हो जाता है। सारे लोग तालियां बजाने लगते हैं। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जो है मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर को बधाइयां देने लगते हैं। की तरफ बढ़िया गाना रिकॉर्ड हुआ है और यह मर्म स्पर्शी गीत गाकर यह दोनों गायक बड़ी ही खुश हैं। तभी प्यारेलाल जी लिफाफे से पैसे निकालते हैं और लता जी को और मोहम्मद रफी को देने लगते हैं। वो बोलते हैं यह क्या है? प्यारेलाल जी धीरे से कहते हैं कि मेरे पिताजी ने आपसे उधार लिया था। आपसे भी और रफी साहब आपसे भी। वो पैसा आज लौटाने का वक्त आया है। दोनों सिंगर उसका हाथ थाम लेते हैं और कहते हैं कि इतना हृदय स्पर्शी गीत तुम लोगों ने बनाया है और इतना रूहानी गीत गाकर जो हमें आनंद आया है और यह पैसे तो हमें लौटा रहे हो। यह समझ लो कि तुम्हारे मिठाई खाने के लिए पैसे हैं। बाबूजी के दिए पैसे जो है हमें नहीं लेने हैं। उसके बाद प्यारेलाल जो है दोनों को धन्यवाद देते हैं। और वो फिल्म का नाम है इज्जत। वो गाना फिल्मांकन हुआ है धर्मेंद्र और तनुजा पर और गीत के बोल हैं यह दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं हम क्या करें और यह गीत इतना मशहूर होता है कि लोगों के जुबान पर कुछ ही दिनों में वह गीत हिंदुस्तान के गली-गली में गाया जाने लगता है।
